राजकुमार सोनीहम पर इल्जाम ये है चोर को क्यों चोर कहा
क्यों सही बात कही, काहे न कुछ और कहा
इसका बदला ये मिला उलटी छुरी हम पे चली
अब तो चारों ही तरफ बंद है दुनिया की गली
हमसे क्या भूल हुई जो ये सजा हमको मिली
दिल किसी का न दुखे हमनेबस इतना चाहा
पाप से दूर रहें, और झूठसे बचना चाहा
ये है इंसाफ तेरा वाह रे दाता की गली
अब तो चारों ही तरफ बंद है दुनिया की गली
हमसे क्या भूल हुई जो ये सजा हमको मिली
एक पुरानी फिल्म जनता हवलदार का यह गीत प्रदेश के गृहमंत्री ननकीराम के बयान को देखकर बड़ी शिद्दत के साथ याद आया है। ननकीराम एक सीधे-सरल और किसी भी काम को पूरी संवेदनशीलता के साथ करने वाले मंत्री हैं, लेकिन पता नहीं क्यों लगता है कि वे जब-जब अपना कोई काम दिल से करने या कहने की कोशिश करते हैं उन्हें लपेटने की चेष्टा प्रारंभ हो जाती है। ‘सच कह दो तो बुरा मानते हैं लोग’ जैसी उक्ति श्री कंवर पर सौ फीसदी फिट बैठती है। श्री कंवर का सच बोलना कई लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर देता है। अभी दो रोज पहले ही उन्होंने भ्रष्टाचार को लेकर विधानसभा में जो चिन्ता जाहिर की है उससे एक वर्ग की प्रतिक्रिया तो ठीक-ठाक मिली है, लेकिन ‘थानेदार घूस खाता है’ जैसा बयान सामने आने के बाद कई लोग परेशान हो उठे हैं। श्री कंवर के इस बयान से सबसे ज्यादा दुखी पुलिस महकमे के अफसर हुए हैं। अफसर कानाफूसी में व्यस्त हो गए हैं। ज्यादातर अफसरों का यह मानना है कि श्री कंवर ने विधानसभा में उनकी पोल खोलकर ठीक नहीं किया है। सबको मालूम है कि थानेदार तो घूस लेता ही है लेकिन उसे बताने की क्या जरूरत है, और फिर बताना भी था तो कम से कम ठीक-ठाक रेट बताया जाता। थानेदार की औकात दस हजार रुपए से ज्यादा नहीं है बताकर एक तरह से श्री कंवर ने रेट गिराने का ही काम किया है। अब जो कोई भी मुर्गा मिलेगा तो वह यह कह सकता है कि टीआई साहब.. मंत्रीजी ने कह दिया है कि आप लोग दस हजार रुपए तक ले सकते हो इसलिए सोच-समझकर मांगो। पुलिस वालों का मानना है कि कई बार मौका-ए-वारदात और परिस्थितियों के मद्देनजर तीन-पांच करने से भी ज्यादा मिल जाता है, लेकिन मंत्रीजी ने एक तरह से ब्रेक लगा दिया है।
दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी हैं जो मानते हैं कि मंत्रीजी ने विधानसभा में ‘थानेदार रिश्वत लेता है’ जैसा बयान देकर ठीक ही किया है। इस बयान के जरिए उन्होंने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। श्री कंवर जब विधानसभा में यह कह रहे थे तब अफसरों की दीर्घा में थानेदार नहीं बल्कि भारतीय पुलिस सेवा के अफसर बैठे हुए थे। यह बयान देकर उन्होंने बड़े अफसरों को यह तो बता ही दिया कि उन्हें सब पता है आप लोगों की दुकानदारी की जड़ में कौन लोग शामिल हैं? थानेदारों पर अंकुश लगाइए। यदि समय रहते थानेदारों पर अंकुश नहीं लगा तो फिर हर रोज कोई न कोई पीड़ित थाने के सामने यह चिल्लाता मिलेगा कि पुलिस ने उसे रिश्वत लेकर बुरी तरह से मारा पीटा है, फंसाया है।
सरकार को घेरने में असफल विपक्ष ने पहले दिन तो मंत्री के बयान का स्वागत किया और कहा कि पहली बार कोई बेखौफ मंत्री मिला है जो सच बोलने की हिम्मत रखता है। विपक्ष के हर सदस्य ने मंत्री के बयान पर मेजें थपथपाईं लेकिन दूसरे दिन जब फिर सदन प्रारंभ हुआ तो विपक्ष ने कहा कि इससे ज्यादा दुर्भाग्यजनक बात कोई और नहीं हो सकती कि प्रदेश का एक जिम्मेदार मंत्री यह मान रहा है कि उसका थानेदार घूस खाता है। यह दुर्भाग्यजनक है.. आदि..आदि।
कुल मिलाकर श्री कंवर के सामने इधर कुआं उधर खाई वाली स्थिति पैदा हो गई है। श्री कंवर के साथ पहली बार ही ऐसा नहीं हुआ। जब वे खाद्य मंत्री बनाए गए थे तब भी राइस मिलों में उनकी छापामार कार्रवाई को शंका के नजरिए से देखने का प्रयास किया गया था। चावल लाबी ने तो उन पर यह आरोप भी लगाया था कि उनके छापे की आड़ में वसूली का धंधा जबरदस्त ढंग से चल रहा है। तब श्री कंवर ने विपक्ष को भी चुनौती दी लेकिन कुछ दिनों बाद जब श्री कंवर हटा दिए गए तब फिर विपक्ष ने यह चिल्लाना प्रारंभ किया कि सरकार एक आदिवासी का मंत्री बने रहना बर्दाश्त नहीं कर पाई। जब प्रदेश में जोगी का शासनकाल था तब कोरबा जिले के कुंदमुरा इलाके में श्री कंवर के साथ एक घटना हुई थी। इस इलाके में कतिपय लोग काफी समय से अवैध शराब का धंधा कर रहे थे। एक दिन ननकीराम कंवर ने शराब बेचने वाले कोचियों को पकड़ा तो कोचियों ने उन्हें जबरिया अपनी जीप में बिठा लिया। इससे पहले कि कोचिए उनका अपहरण कर पाते श्री कंवर ने उनकी धुनाई प्रारंभ कर दी। कोचियों और ननकी के बीच यह संघर्ष कई किलोमीटर तक चलता रहा, अंतत: जीप में चल रहे युद्ध का नतीजा यह हुआ कि गाड़ी पलट गई और कोचिए भाग खड़े हुए। ननकी तो घायल हो गए लेकिन उस घटना के बाद से उनके इलाके रामपुर में अवैध शराब की बिक्री पूरी तरह से बंद हो गई। ऐसा नहीं है कि उनके इलाके में लोग शराब नहीं पीते लेकिन उन्हें शराब लेने के लिए कोथारी गांव तक आना होता है। इस गांव में एक शराब दुकान है जिसे शराब बेचने का लायसेंस मिला हुआ है। यह एक दुकान भी समय पर खुलती और बंद होती है। पूर्व वित्तमंत्री रामचंद्र सिंहदेव के बाद ननकी प्रदेश के दूसरे ऐसे मंत्री है जो शराब से बेहद नफरत करते हैं और बगैर चेप्टी (शराब का पौवा) बांटे ही चुनाव जीतते रहे हैं। कोई कहीं भी कुछ भी बोले या चिल्लाए लेकिन हकीकत तो यही है कि इन दिनों श्री कंवर के लिए ‘लोग’ क्या बात है जैसे शब्दों का इस्तेमाल तो कर रहे हैं।












