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Thursday, March 18, 2010

भंडाफोड

राजकुमार सोनी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गुरूकुल आश्रम के संचालक नारायण राव के खिलाफ छिपे हुए कैमरों से अभियान चलाने वालों की नीयत को लेकर मैं पहले भी लिख चुका हूं, लेकिन आज आपको उस सीडी का सच बताने जा रहा हूं जो मुझे कहीं से मिली है। इस सीडी को आप दस नहीं बीस बार भी सुन ले तब भी कहीं से यह नहीं लगेगा कि आश्रम के संचालक ने बच्ची को बेचने के लिए अपनी ओर( इस शब्द पर ध्यान दीजिएगा) से पैसों की मांग की है। अपनी पुरानी पोस्टों में मैं लिख चुका हूं कि आश्रम का संचालक आश्रम का विस्तार चाहता था इसके लिए उसने कथित तौर पर बच्चा गोद लेने आए लोगों से निवेदन किया था कि वह आश्रम के लिए ईंट, गिट्टी, रेत सीमेंट आदि की व्यवस्था कर दें। सीडी में एक छुटभैय्ये नेता और आश्रम संचालक के बीच फोन पर जो बातचीत हुई है उसमें सीमेंट, छड़ का जिक्र है।

आश्रम संचालक और साजिशकर्ताओं के बीच बातचीत के कुछ अंशों का मैं नीचे कहीं उल्लेख करूंगा लेकिन उससे पहले कुछ जरूरी बात आपके सामने रखना चाहता हूं। पाठकों इस घटना में पहले भी बता चुका हूं कि किस तरह मूल्यों को किनारे रखकर कुछ लोगों ने एक गरीब और मजबूर आश्रम संचालक को अपना निशाना बनाया। ऐसे समय जबकि दो बच्चों का पेट पालना दूभर है तब लगभग दूसरों के लगभग पचास बच्चों की रखवाली करने वाला इसलिए निशाने पर आया क्योंकि उसके आश्रम के बच्चों ने एक दिन मेद्यापाटकर का विरोध कर दिया था। पाठकों आपको मैं बता चुका हूं कि किस तरह से सुपारी लेने वालों ने कार्रवाई के लिए पुलिस पर दबाव बनाया। एक सीडी को तैयार कर पुलिस से कार्रवाई की मांग की। जब नारायण राव को उरला की पुलिस ने पूछताछ के बहाने थाने में बिठाया तो सुपारी लेकर काम करने वाले सारी रात थाने में डटे रहे। मित्रों क्या आपको यह बताने की जरूरत है ऐसा कौन करता है। ऐसा तब होता है जब कोई किसी को पूरी तरह बरबाद कर देना चाहता है। आपका काम खबर लिखना है। लिखने के बाद पुलिस आपकी खबर पर संज्ञान लेती है या नहीं इसके लिए दबाव बनाना नहीं। यह काम वे लोग ही कर सकते हैं जो सुपारी लेकर काम करते हैं। किसने किसको सुपारी दी और कौन इसकी जड़ में है इसकी छानबीन तो शायद अब जाकर शुरू हो क्योंकि नारायण राव की पत्नी ने कई तरह के सवालों के बीच मुख्यमंत्री, गृहमंत्री तथा पुलिस अधीक्षक को एफआईआर दर्ज करने की मांग के साथ शिकायती पत्र सौंप दिया है। इस पत्र में उन्होंने नक्सलियों से सांठगांठ का उल्लेख तो किया है यह भी बताया है कि किस तरह से कांग्रेस के लोगों ने उनके आश्रम के बच्चों और युवतियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया था। बहरहाल अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है क्योंकि नारायण राव पर एफआईआर दर्ज करने के मामले में पुलिस ने जो तेजी दिखाई है उससे तो ऐसा लगता है कि छत्तीसगढ़ की पुलिस को शिकायत मिलते ही एफआईआर दर्ज करने की कला में महारत हासिल है। पुलिस ने कुछ चंगू-मगुंओं के द्वारा सौंपी सीडी के बाद यह पता लगाने की कोशिश भी नहीं की कि सीडी की वास्तविकता क्या है। उसमें कहां-कहां कट हुआ है या नहीं। जो आडियो सीडी सौंपी गई है उसमें किसकी आवाज है। पाठकों सच तो यह है कि छत्तीसगढ़ में सीडी की जांच की मशीन नहीं है। इसकी जांच संभवतः बैंगलोर या कहीं और होती है। पुलिस ने सीडी की जांच भी नहीं करवाई और नारायण राव को फांसी पर लटकाने का इन्तजाम कर दिया। इस मामले में एक नया तथ्य यह भी प्रकाश में आया है कि साजिशकर्ताओं की रपट लिखवाने से पहले नारायण राव ने बच्चा ले जाने वाले के खिलाफ उरला थाने में शिकायत सौंप दी थी। कानून के जानकारों का कहना है कि जो आदमी पहले रपट लिखवाने पहुंचे तो पुलिस को चाहिए कि वह पहले उसकी रपट पर ध्यान दें लेकिन इस मामले राव के बाद शिकायत सौंपने वालों की ज्यादा सुनी गई। शिकायतकर्ताओं ने अपनी शिकायत में साफ-साफ कहा है वह किसी दूसरे के नाम से आपरेशन को अन्जाम देने पहुंचे थे। यहां सवाल यह उठता है कि किसी दूसरे के नाम से आपरेशन को अन्जाम देने वालों ने फिर उसी नाम से रपट क्यों नहीं लिखवाई। समझदार पुलिस की समझदारी देखिए कि उसने फर्जीनामधारी कौन है इसका पता चल जाने के बाद भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। अब इससे पहले कि सीडी की बातचीत के कुछ अंशों का जिक्र किया जाए। यहां यह बताना जरूरी है कि पूरी सीडी में पेमेंट कर देने की बात तो व्यापारी बनकर गए लोग ही करते हुए सुनाई देते हैं।

हैलो

हां सर...

कल 11 बजे अम्माजी के हाथों दे दूंगा

आश्रम आएंगे

मांजी के वहां भिजवा दूंगा

11 बजे तक पहुंच जाएंगे

तो अपन सीमेंट-वीमेंट दिए उनको बोल दे

ढाई लाख कल आपको दे दूंगा। आपको जो चाहिए मंगा लीजिए। ढाई लाख कल दे दूंगा।

कल 11 बजे आप माताजी के यहां छोड़ दिए

आप बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं। पुण्य का काम कर रहे हैं।

बच्चे भगवान है। आपको माध्यम बनाकर भेजा हम तो आग्रह करते हैं।

(सीडी में बहुत सी बातें अस्प्ष्ट है जो कुछ और ही इशारा करती है। सीडी में एक जगह एक छुटभैय्या नेता यह बोलता है कि जो बच्चा लेने के लिए आने वाला था उसने पंडित जी से बोलकर बच्ची के प्रवेश की तिथि निकलवाई है। सीडी में सूतक आदि का भी जिक्र होता है और यह आवाज भी सुनाई देती है कि 2 मार्च को बच्ची को लेने आएंगे। बस पंडितजी ने बता दिया है कि इसी दिन बच्ची को प्रवेश दिलाना है। छुटभैय्या बार-बार यह भी कहता है कि हमारी बच्ची का ख्याल रखना। सीडी में अन्य बच्चों के पंजीकरण आदि का उल्लेख भी होता है और यह भी साफ सुनाई देता है कि कुछ लोगों का जोर सिर्फ और सिर्फ पेमेंट देने और देने को लेकर ज्यादा है)

बावजूद इसके मैं यह सारी बातें नारायण राव को निर्दोष कहने के लिए नहीं लिख रहा हूं। मुझे लगता है कि यदि आदमी ने वकालत न भी की हो तो उसके भीतर का बैठा वकील उससे सवाल-जवाब तो करता ही है। यही वकील उसे बताता है कि अच्छी-बुरी बातों में जिरह कैसे होती है। मैं बार-बार यह बात कह चुका हूं। एक बार फिर कह रहा हूं कि मेरी लड़ाई आदमी से नहीं वरन प्रवृतियों से है। ऐसी प्रवृति से जो मनुष्य को मनुष्य समझने के खिलाफ है। मैं अदालत का हमेशा से सम्मान करता आया हू् और आगे भी करता रहूंगा। तथ्यों के आलोक में ही अब यह साबित हो पाएगा कि नारायण राव गलत है या अभियान चलाने वाले सही। इसके लिए हमें इन्तजार तो करना ही होगा। हो सकता है कि मैं गलत भी साबित हो जाऊँ या फिर अभियान चलाने वाले गलत हो जाए। दोनों ही हालात में मैं फिर वहीं कहूंगा- बच्चों ने हमारा कुछ नहीं बिगाड़ा हमें उनके बारे में सोचना चाहिए था। पाठकों.. आश्रम में बच्चे सुखी रहे। उन्हें कोई ताकत अलग न कर सकें इसके लिए आप दुआ करें। इस वक्त जबकि रात का सन्नाटा गहराता जा रहा है मैं यह सोचकर ही रोमांचित हूं कि किसी बच्चे के सपने चुपके से किसी खरगोश का प्रवेश हुआ होगा। क्या बच्चों के सपनों में छुरा घोंपने वालों के खिलाफ खड़े होकर मैंने कोई गलती की है।

7 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

sonI sahab, aapki soch bilkul sahi hai..
bachchon ne kisi ka kya bigara hai.

दीपक 'मशाल' said...

sarthak report lagi ye bhi.

ललित शर्मा said...

ये तो अपनी बात किसी के मुँह मे
जबरिया डालकर बोलवाने वाला काम है।
आपके कथनानुसार तो इनकी नीयत पर
शक होता है।

Suman said...

nice

श्याम कोरी 'उदय' said...

.... सबसे पहले तो रिकार्डिंग की गई वार्तालाप की जांच रिपोर्ट ही स्पष्ट कर सकेगी "कितनी सच-कितनी झूठ" है वैसे भी इस तरह की रिकार्डिंग बातें "साक्ष्य के रूप में ग्राह्य(स्वीकार)नहीं होतीं" .... अब समस्या यहां पर ये है कि फ़ंसाने वालों ने ये प्रयास क्यों किया / फ़ंसाने के पीछे मकसद क्या है इन मुद्दों को भी "हाईलाइट" किया जाना आवश्यक है (सिर्फ़ मेघा पाटकर का विरोध करना ही एकमात्र कारण नही हो सकता).... यह एक आश्रम से जुडा मुद्दा है फ़ंसने/फ़साने के पीछे किसी "मास्टर प्लानिंग" से इंकार नही किया जा सकता ... इसलिये "जांच समीति" गठित कर निष्पक्ष जांच होना चाहिये...प्रभावशाली अभिव्यक्ति!!!!

नरेश सोनी said...

एक बार फिर आपको बधाई..। इतना सब कुछ होने के बाद भी यदि सरकार या प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है तो कम से कम कलमनवीसों को तो जनमत तैयार करना ही चाहिए। आपका प्रयास सराहनीय है। पिछले कुछ समय से कैमरे की आड़ में दलाली करने वालों की एक पौध सी पैदा हो गई है। इस पर आप जैसे कलमकारों के ही दम अंकुश लगाया जा सकता है। पुनश्च शुभकामनाएं...

Deepak said...

thankyou soni sir for you great supoport for childrens of aashram.please link with http://www.deepak-aniketan.blogspot.com/