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Wednesday, February 10, 2010

शाबाश संजीव..

राजकुमार सोनी

हिन्दी के विकास में योगदान देने के लिए देश के ख्यातिलब्ध ब्लागर संजीव तिवारी को राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ने राष्ट्रभाषा अलंकरण से सम्मानित किया है। इस अलंकरण के लिए श्री तिवारी को बार-बार ‘शाबाश’ तो कहा ही जा सकता है। ‘आरंभ’ और ‘गुरूत्तर गोठ' जैसे ब्लागों के जरिए अपनी राष्ट्र व्यापी ख्याति बनाने वाले ‘संजीव’ उसी शहर में रहते हैं जहां पहले कभी मैं रहा करता था। इस शहर के नलों से निकलने वाले ‘आयरन युक्त पानी’ की खासियत यह है कि उसे पीकर आदमी स्टील का बन जाता है। यहां के लोगों के बारे में लोग यह कहने से नहीं चूकते कि ‘भाई’ बात करो तो भिलाई वालों के समान जिसमें ‘भलाई’ छिपी हो. सचमुच, मैं तो ब्लाग जगत में आना ही नहीं चाहता था लेकिन हरिभूमि अखबार में छपने वाले मेरे लेखों को एक सुधि पाठक की तरह निरंतर बांचने वाले संजीव ने मुझसे जब भी बातचीत की तो यह पुछल्ला जरूर जोड़ा कि ‘भैय्या आप ब्लाग की दुनिया’ में एक बार कूदो तो सही। इसे आप संजीव का आग्रह समझे निवेदन या कुछ और लेकिन हकीकत तो यही है कि यदि संजीव की बातें मेरा पीछा नहीं करती तो शायद मैं इस क्षेत्र में आता ही नहीं। वैसे प्रेशर डालने वालों में प्रेस क्लब के अध्यक्ष भाई अनिल पुसदकर की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। चूंकि मैं तकनीकी तौर पर अभी उतना सक्षम नहीं हो पाया हूं सो इस विषय पर मिलने वाले महती सहयोग के लिए भाई अजय सक्सेना को कैसे भूल सकता हूं। विनोद डोंगरे और राजकुमार ग्वालानी को भी मैं इस मौके पर याद कर रहा हूं।

... तो संजीव ने मेरा ब्लाग बनाया और आज आप सबके सहयोग व स्नेह से ‘बिगुल’ बजने लगा है। संजीव ने मुझ जैसे और भी सैकड़ों ब्लागरों को ‘खूबसूरत’ दुनिया में प्रवेश के लिए उकसाया है। इस प्रेरणा के लिए मैं संजीव का तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूं। संजीव ने अपने ब्लाग आरंभ और गुरुत्तर गोठ के जरिए न केवल हिन्दी की बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी की भी सेवा की है। आप उनके ब्लाग पर जाएंगे तो वहां आपको छत्तीसगढ़ का समृद्ध सांस्कृतिक संसार अवश्य देखने को मिलेगा। उनकी हर रचना में छत्तीसगढ़ ‘धड़कता’ हुआ नजर आएगा। यह सही है कि नक्सलवाद ने इस प्रदेश को अपने घेरे में ले रखा है, लेकिन संजीव इस गंभीर विषय पर चिंता के साथ यह बताने हुए भी नजर आते हैं कि छत्तीसगढ़ में सिर्फ ‘नक्सलवाद’ ही नहीं है, संजीव के ब्लाग से गुजरना यानी धान कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ से गुजरना है। ‘छत्तीसगढ़’ को पूरे देश व दुनिया के सामने लाने वाले संजीव तिवारी के लिए ‘वेलडन’ ‘शाबाश’ ‘क्या बात है’ बधाई हो जैसे शब्दों का इस्तेमाल तो मैं कर ही सकता हूं। मुझे मालूम है हरदिल अजीज संजीव के लिए आप भी यही कहने वाले हैं।

दोस्तो, संजीव को यह सम्मान प्रेस क्लब रायपुर में दस फरवरी को दिया गया है। इस मौके पर देश के लब्ध प्रतिष्ठित पत्रकार रमेश नैय्यर जी को राजेंद्र प्रसाद शुक्ल सद्भावना सम्मान भी दिया गया है। श्री नैय्यर जी को भी बधाई। हां बधाई गिरीश पंकज जी को भी। सचमुच उनका और उनकी टीम का सलेक्शन जानदार था।

23 comments:

श्याम कोरी 'उदय' said...

...बहुत बहुत बधाईंया!!!!

जी.के. अवधिया said...

संजीव जी को बहुत बहुत बधाई!

जी.के. अवधिया said...

ललित जी ने मुझे फोन करके संजीव जी को बधाई प्रेषित करने का अनुरोध किया है अतः ललित जी की ओर से भी संजीव जी को बहुत बहुत बधाई!

युवराज गजपाल said...

I am following sanjeev ji's blog from the beginning. I have seen his commitment and struggle to popularize blogs among Chhattisgarhiya. You can get the complete picture of Chhattisgarh from his blog. I will say that this award is just a token appreciation for his hard work and commitment for Chhattisgarh. I feel that he deserves more than this award.
I congratulate from my heart to Sanjeev ji for this excellent achievement.

अनुनाद सिंह said...

संजीव जी को बधाई।

(लेकिन आपको 'वेलडन' लिखने से परहेज करना चाहिये था। हिन्दी में 'वेल्डन' का अर्थ है - 'वेल्डिंग' ।

संगीता पुरी said...

संजीव जी को बहुत बहुत बधाई !!

Sanjeet Tripathi said...

अब फूफाजी कहूं या भैया कहूं लेकिन मूल बात यह है कि संजीव जी को बधाई।
वे इस अवार्ड के हकदार थे इसलिए ही उन्हें यह अवार्ड मिला।
मुझे याद आतें हैं वे दिन जब छत्तीसगढ़ से महज गिनती के ही हिंदी ब्लॉगर हुआ करते थे और समूचे इंटरनेट पर तो कुछ सौ ही। तब से ही संजीव जी ने हिंदी ब्लॉग जगत में छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ की अलख जगाए रखी है।
आज जब हिंदी ब्लॉगर्स की यह संख्या समूचे इंटरनेट पर हजारों में पहुंच रही है और छत्तीसगढ़ में सैकड़ों में तब भी यह आदमी आत्माभिमान से भरी या महज एक समूह के हितों से जुड़ा या फिर आत्मकेंद्रित पोस्ट लिखता हुआ नजर नहीं आता। शायद हिंदी ब्लॉगजगत में छत्तीसगढ़ के संजीव तिवारी की यही पहचान है।
बधाई व शुभकामनाएं उन्हें, ऐसे ही वे अपनी उर्जा व लेखनी समेत पठन भी छत्तीसगढ़ पर केंद्रित किए रहें,
मुझ अकिंचन की इसी शुभकामना के साथ।

Anil Pusadkar said...

मैं व्यस्तता के कारण उस कार्यक्रम मे उपस्थित नही रहा मगर कार्यक्रम खतम होने के बाद संजीव से मिलकर उन्हे बधाई दे दी।एक बार फ़िर से बधाई हो संजीव आप इसके असली हक़दार हैं।

Raviratlami said...

संजीव भाई ल गाड़ा गाड़ा, पर्रा भर के बधाई!

Udan Tashtari said...

संजीव जी को बहुत बहुत बधाई!

Dr. Smt. ajit gupta said...

हमारी भी बधाई स्‍वीकार कर लीजिए।

Shiv Kumar Mishra said...

संजीव को हार्दिक बधाई. शुरुआती दिनों से ही संजीव की कर्मठता का कायल रहा हूँ और आज यह पुरस्कार के बारे में जानकार बहुत ख़ुशी हुई. संजीव को भविष्य के लिए भी शुभकामनाएं.

Ramesh Sharma said...

संजीवजी को बधाई देने का लोभ मैं भी संवरण नहीं कर पा रहा हूँ. हार्दिक बधाई के साथ शुभकामना कि अभी तो यह 'आरम्भ' है. उनसे मिलना तो नहीं हो पाया मगर उनका काम बोलता है. छत्तीसगढ़ के तमाम ब्लॉगर्स को एक मंच पर लाना और उनके यूआरएल को संकलित करके एकरूपता देना काफी समयसाध्य मगजमारी और समर्पण भावना के साथ किया जाने वाला काम था जो उन्होंने किया. भाई संजीव से भी मैंने उनकी काफी तारीफ़ सुनी है. सम्मान कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो पाने का सचमुच खेद है.
-रमेश शर्मा

शरद कोकास said...

संजीव ने हिन्दी ब्लॉगिंग से छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों को जोडने की दिशा में प्रशंसनीय प्रयास किया है । यह बात अलग है कि यहाँ के साहित्यकार इस माध्यम की ओर अभी भी शंका से देख रहे हैं । हर किसी को संजीव ब्लॉग बनाने की मुफ्त सलाह ही नहीं देता बल्कि उनके ब्लॉग भी बनवा देता है यह अलग बात है कि वे इसे जारी नही रख पाते । संजीव फिर भी कोशिश में लगा ही रहता है । यह संजीव की उदारता है । इस सम्मान का वह हक़दार है बल्कि ब्लॉगजगत में भी यदि सम्मान की परम्परा शुरू हो तो वह उसे मिलना चाहिये । इस अवसर पर कुछ पारिवारिक कारणों की वज़ह से मै शामिल नहीं हो सका, अलबत्ता बधाई मैने दे दी थी । राजकुमार सोनी के इस ब्लॉग के माध्यम से भी बधाई और राजकुमार की इस कार्य के लिये भूरि भूरि प्रशंसा ।

Rahul said...

बहुत बहुत बधाई हो !!
ऐसे ही लगातार लिखते रहिये ...

जयप्रकाश मानस said...

मुझे खुशी है कि चार साल पहले हमने जो सपना देखा था वह अब साकार हो रहा है, किन्तु छत्तीसगढ़ को ब्लॉग के माध्यम से देश विदेश तक ले जाने वाले बहुत सारे खामोश होकर काम कर रहे हैं उन्हें लोग पहचानना नहीं चाहते । और वे भी इस चक्कर में नहीं रहते कि लोग उन्हें इस तरह याद करें.... जैसे रवि जी, शर्मा जी, रवि जी को पहले ही मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित कराया जा चुका है, सृजन-सम्मान द्वारा । और वह पहल अब कई संस्थाएं कर रही हैं । अच्छा है... जारी रहे... आपने जो अपने अखबार में इसे पहला सम्मान लिखा था सच नहीं है ।

सूर्यकान्त गुप्ता said...

भाई संजीव को देर ही सही उनके सराहनीय कार्य के लिए कोटि कोटि बधाई
मैं भी अभी बधाई देने लायक नहीं हो पाता,
वह तो धन्य है संजीव जिसने ब्लॉग लिखने के लिए
बड़े शालीन शब्दों में की मुझपर चढ़ाई

Ajay Tripathi said...

आपका संजीदा लेखन समाज का दर्पण हैं आपको दिया गया राष्‍ट्र भाषा सम्‍मान प्रदेश के समस्‍त ब्‍लॉगर्स का सम्‍मान हैं हम सब इसके लिए इस समिति को धन्‍यवाद देते हैं जिन्‍होंने यह परंपरा की शुरूआत की है

मेंरे और मेरे परिवार की ओर से अनेको अनेक शुभकामनाएं

ashwini kesharwani said...

भाई संजीव को देर ही सही उनके सराहनीय कार्य के लिए कोटि कोटि बधाई

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

आप सभी के स्‍नेह के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.

PREM NARAYAN AHIRWAL said...

प्रतिभा कभी किसी की मोहताज नही होती सम्मान हमारे लिए सम्मान है हिदी को अनगिनत पैगाम है

Ratan Singh Shekhawat said...

बहुत बहुत बधाई हो

vaibhav shiv said...

thik kahte hai bhaiya sanjeev bhiya hardil ajeej hai ...aur unke liye shabash shabd bhi kam hai...sanjeev bhiya ki kripa se mai bhi blog ki dumniya me aa gya hu...